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 ( हिन्दी समाचार- 2012)
 

 तीर्थंकरों की 500 साल पुरानी प्रतिमाएं चोरी
  Bankhoh, November 7, 2012: जाटवाडा गांव मे सोमवार रात चंद्रप्रभु दिगंबरा जैन मंदिर से बेशकीमती 26 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं चोरी हो गई| पाषाण व अष्टधातु से निर्मित ये मूर्तियां करीब 500 साल पुरनी थी | हालाकि अष्टधातु की एक प्रतिमा पास के खंडहर में मिली|
इसी मंदिर से वर्ष 2002 में भी नीलम निर्मित श्रीपार्श्वनाथ की प्रतिमा चोरी हो गई थी | यहा तीर्थंकरो की पाषाण निर्मित 3 व 23 अष्टधातु प्रतिमाए थी | सोमवार रात पुजारी प्रकाशचंद जैन मुख्य द्वार पर ताला लगा कर चला गया | सुबह द्वार खोला तो सिद्ध भगवान की दो, आदिनाथ प्रभु कि पाषाण प्रतिमा, शांतिनाथ, श्रीपार्श्वनाथ, माहावीर स्वामी आदि की 23 प्रतिमाएं व अष्टधातु से निर्मित मूर्तियां चोरी होना पाया| 
  जंतर मंतर में आयोजित अहिंसा रैली और विरोध सभा
 
September 1, 2012: लखनऊ में शरारती तत्वों द्वारा महावीर स्वामी की प्रतिमा को खंडित करने के विरोध में जैन समाज ने जंतर मंतर में आयोजित अहिंसा रैली में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन मे सभी धर्मं के गुरु, सभी जैन समुदाय के लोग, साधू, इमाम्, राजनेता और भारी संख्या में जैन समाज के लोग एकत्रित हुए। इन्होने एक स्पष्ट संदेश दिया कि जैन समाज के अपराधीयो को दंड मिलना चाहिये और हम आगे चलकर ऐसी घटनाओंके खिलाफ़ एक साथ खडे है।
विरोध सभा में सांसद, इमाम उमर अहमन इलियासी - अध्यक्ष ओल इंडिया इमाम ओर्गनाइजेसन, इसाई समाज के father domnick जी, हिन्दू समाज के प्रज्ञानंद जी, सिख समाज से परमजीत सिंह जी, इन सब गणमान्य लोगो ने लखनाउ सरकार से जल्दी से जल्दी इस पर कदम उठाने को कहा और कहा की आरोपियों को जल्दी से जल्दी पकड़ा जाए। अखिलेश यादव जी ने लखनऊ से एक सांसद को भी भेजा, उन्होंने कहा की नयी प्रतिमा स्थापित करवाई जायेगी और जिन लोगो ने ये किया है उनको पकड़ने की मुहीम भी चलाई जायेगी |
इस अवसर पर आचार्य श्री सन्मतिसागर जी मुनिराज, मुनि श्री पुलकसागर जी मुनिराज, मुनि श्री तरुणसागर जी मुनिराज का सन्देश भी पढ़ा गया लेकिन चातुर्मास चलने और दुरी ज्यादा होने से ये मुनि नहीं आसके !
जैन समाज से लोकेश मुनि जी ससंघ वहां उपस्तिथ थे, निर्मल कुमार सेठी जी - महासभा, संजय जैन जी - विश्व जैन संगठन, चक्रेश जैन - अध्यक्ष जैन समाज आदि बहुत सारे गणमान्य व्यक्ति और बहुत ही ज्यादा संख्या में जैन लोग उपस्थित थे।
सब लोग वहा पर महावीर स्वामी की जय , अहिंसा विश्व धर्मं की जय,, ऐसे नारे लगा रहे थे..जैनियों द्वारा साफ़ रूप से कहा गया ये हमारी आस्थाओं पर प्रहार है......

  गणिनी आर्यिका पार्श्वमति माता का देवलोक गमन

   जयपुर, April 14, 2012: दिगंबर जैन गणिनी आर्यिका सुपार्श्वमति माता का शुक्रवार को देवलोक गमन हो गया| वे 84 बर्ष की थी और बर्ष 2007 से जयपुर में ही चातुर्मास पर थी | वे देश में सर्वोच्च गणिनी आर्यिकाओ में मानी जाती थी| उनका अजमेर रोड पर बड का बालाजी स्थित चूडीवाल फार्म हाउस में अंतिम संस्कार किया गया| 

  भगवान महावीर की विशाल रथयात्रा में उमड़ा सैलाब
 
  महावीरजी/ जयपुर, April 8, 2012: हर मन में श्रद्धा उमड़ रही थी, कण-कण भक्ति की बयार से सराबोर था, हर ओर बरामदों व छतों पर पलक पांवड़े बिछाए बेसब्री से इंतजार करते श्रद्धालुओं को जैसे ही प्रभु महावीर के  दर्शन हुए। पूरा वातावरण श्रीजी के जयकारों से गूंज उठा। श्री महावीरजी के वार्षिक मेले के  तहत शनिवार को आचार्य विरागसागर महाराज व आचार्य सन्मान सागर महाराज के ससंघ के सान्निध्य में भगवान महावीर की विशाल रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा में श्रद्धा का  सैलाब उमड़ पड़ा। श्रीमहावीरजी की रथयात्रा में शामिल होने श्रद्धालु शुक्रवार रात ही श्री महावीरजी एवं मंदिर परिसर में आ डटे थे। मुख्य मन्दिर से महावीर भगवान की प्रतिमा का अभिषेक करने के बाद केसरिया वस्त्र पहने, रजत मुकुट लगाए इंद्रों का रूप धारण किए श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को मंदिर से स्वर्णिम आभा से सुसज्जित रथ में विराजमान किया। इससे पहले प्रबंधकारिणी कमेटी ने मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की मूर्ति निकालने वाले चर्मकार वंशज के प्रतिनिधि का सम्मान किया गया। इसके बाद रथयात्रा का शुभारंभ हुआ।
सबसे आगे निशान का घोड़ा उसके बाद बैंड स्वर लहरिया बिखेर रहा था। बैंड के पीछे 21 केसरिया ध्वज रथयात्रा को विशिष्ट स्वरूप दे रहे थे। उसके पीछे धर्मचक्र और फिर जैन मूल संघ आमनाय भट्टारकजी की पालकी को उठाए श्रद्धालु चल रहे थे। पालकी के पीछे ऐरावत हाथी लोगों का मन मोह रहा था। रथ पर उपजिला कलेक्टर प्रेमाराम परमार व प्रबंधकारिणी कमेटी के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति एन. के. जैन सारथी के रूप में बैठे थे। रथयात्रा के साथ प्रबंधकारिणी समिति के उपाध्यक्ष राजकुमार काला, नरेंद्र कुमार पाटनी, कोषाध्यक्ष महेंद्र कुमार पाटनी सहित कार्यकारिणी के सदस्य भगवान महावीर के जयकारे लगाते चल रहे थे। रथयात्रा को मीणा जाति के लोग नाचते गाते गंभीर नदी के तट पर ले गए। गंभीर नदी के तट पर रथ यात्रा धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। यहां श्रीजी की अष्टद्रव्यों से पूजा अर्चना कर कलशाभिषेक किए गए। धर्मसभा के बाद गुर्जर जाति के ग्रामीणजन जिनेंद्र रथ को मंदिर परिसर तक लाए। इसके बाद श्रीजी को वेदी में विराजमान किया गया। भास्कर न्यूज 
 19 साल बाद हुआ गुरु-शिष्य का मिलन

  रोमटेक/मुंबई, February 25, 2012. महाराष्ट्र में नागपुर के समीप रामटेक में शुक्रवार को जैन समाज का पंचकल्याणक महोत्सव शुरू हो गया। इस दौरान उन्नीस साल बाद गुरु आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज और उनके परम शिष्य मुनिश्री सुधासागरजी महाराज का मिलन हुआ।  अपने गुरु से मिलते ही मुनिश्री सुधासागरजी के अश्रु निकल आए। यह दृश्य देश के कोने-कोने से आए हजारों जैन धर्मावलंबियों ने देखा। Source: Dainik Bhaskar

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